निकोला टेस्ला का संघर्ष

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निकोला टेस्ला का संघर्ष

निकोला टेस्ला का संघर्ष

रात का दूसरा पहर था, मरघट सा पसरा सन्नाटा और दूर तक फैला अँधेरा, दिए की बत्ती भी घंटो जलकर बुझ चुकी थी।  बात उस दौर की है जब आज-कल की तरह न तो इलेक्ट्रिसिटी (बिजली) थी और ना ही कोई ऐसा दूसरा श्रोत जो घरों, सड़को और गलियों को दिन/ रात के फर्क को समझने में कोई कनफ्यूज़न पैदा करे। दस जुलाई अट्ठारह सौ छप्पन की उस रात को क्रोएशिया में एक पादरी का घर, एक नवजन्मे बच्चे की किलकारी से गूँज उठा।  यह नवजात शिशु आने वाले भविष्य के भविष्य  को बदलने वाला था। माँ, पिता ने इस बालक को नाम दिया निकोला, निकोला टेस्ला….!


प्रारंभिक शिक्षा के बाद यह बालक अब युवावस्था में प्रवेश कर चुका था। ऑस्ट्रिया के टेक्निकल कॉलेज ऑफ़ ग्राज़ (GRAZ) में स्नातक की पढाई के लिए निकोला टेस्ला ने दाखिला लिया।  कहते हैं कि वहां सुबह तीन बजे से देर रात ग्यारह बजे तक बिना थके ये अनवरत काम करते थे।  टेस्ला अद्भुत प्रतिभा के धनी थे, वो सात भाषाएँ समझ बोल सकते थे तो वहीँ कैलकुलस की जटिल से जटिल समस्याओं को मौखिक रूप से हल कर देते थे। क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इतने बेहतरीन स्टूडेंट को कॉलेज से निकाल दिया गया?  जैसा कि युवावस्था में ज्यादातर लोगो के साथ होता हैं बुरी संगत में टेस्ला को गैंबलिंग (जुआं) खेलने की बुरी लत लग गयी। कॉलेज से निकाले जाने के बाद टेस्ला ने यूरोप की तरफ रूख किया और यह कदम आने वाले कल को बदलने वाली राह पर पहला कदम था। ये वो दौर था जब फ्रांस में गुस्ताव एफिल नाम का इंजीनियर एक ऐसे काम को अंजाम दे रहा था जो फ्रांस की पहचान बनने वाला था। आगे चलकर एफिल टावर का नाम उन्ही के नाम पर पड़ा।  टेस्ला ने इसी शहर को अपनी शुरुआती कर्मभूमि के रूप में चुना। थॉमस अल्वा एडिसन की इलेक्ट्रिक कंपनी की पेरिस ब्रांच में टेस्ला ने अपने करियर की शुरुआत की।  बहुत जल्द अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से टेस्ला ने सभी  सीनियर्स को प्रभावित कर लिया। 


इतिहास की किताब पर एक नया  अध्याय तब लिखा गया जब निकोलस टेस्ला और थॉमस अल्वा एडिसन का आमना सामना हुआ।  एडिसन बहुत जल्द समझ गए कि टेस्ला कोई साधारण कर्मचारी नहीं हैं।  वो जिस उद्देश्य को लेकर चल रहा हैं वो एडिसन के आर्थिक साम्राज्य को हिला कर रख देगा।  दरअसल तब तक (अक्टूबर 1879 ) एडिसन बिजली से जलने वाले बल्ब की खोज करके खुद को विज्ञान के क्षेत्र में  अग्रिम पंक्ति में स्थापित कर चुके थे।  


एडिसन ने डायरेक्ट करंट (DC ) से चलने वाले पावर स्टेशन्स को स्थापित कर स्ट्रीट लाइट द्वारा अमेरिका के कई शहरों  को जगमग रोशनी से नहला दिया था।  एडिसन के अविष्कार ने उन्हे उनका अकूत साम्राज्य स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।  एडिसन का DC पावर का बिज़नेस अब अपनी सीमाएं बढ़ा रहा था।  DC पावर के लगभग सारे पेटेंट एडिसन के नाम  दर्ज थे। 


टेस्ला को यह समझते देर ना लगी कि DC पावर बहुत प्रभावी नहीं हैं  इससे  सिर्फ आधा मील की दूरी तक ही पावर सप्लाई की जा सकती हैं और यह बहुत महंगी भी हैं।  टेस्ला ने इसके विकल्प के बारे में सोचना शुरू कर दिया और बहुत जल्द वो अपनी नयी योजना और प्लान के साथ एडिसन के सामने थे।  यह दो दिग्गजों के मतों का टकराव था जिसमें पावर सप्लाई के भविष्य का निर्धारण होना था।  टेस्ला ने AC पावर का विकल्प एडिसन के सामने रखा।  AC, DC की तुलना में बेहद फिफयती थी।  यह एक ऐसी करंट थी जिसे बिना किसी बैटरी की मदद के सिर्फ चुंबकीय किरणों में परिवर्तन करके उत्पन्न किया जा सकता हैं।  


AC एक ऐसा विकल्प था जिसे बिना किसी पावर लॉस के लम्बी दूरी तक बड़ी सुगमता से ट्रांसमिट किया जा सकता हैं।  जबकि DC के साथ यह संभव ना था।  इतना सस्ता विकल्प निश्चित रूप से एडिसन के बिज़नेस एम्पायर को तहस नहस  कर देता।  एडिसन ने टेस्ला को यह कहकर इस प्रोजेक्ट पर आगे काम करने से मना कर दिया कि AC पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता और आने वाले भविष्य में इसके भयावह परिणाम होंगे।  यहाँ से इन दो दिग्गजों के बीच अदावत की, दुश्मनी की एक दीवार खड़ी हो गयी।  


अंततः 1885 में टेस्ला ने मानसिक उत्पीड़न और अवहेलना से तंग आकर एडिसन की कंपनी छोड़ दी।  टेस्ला के AC प्रोजेक्ट में इन्वेस्टर्स (निवेशकों) ने कोई खास रूचि नहीं दिखाई और भारी आर्थिक नुकसान की वजह से टेस्ला को अपनी कंपनी बंद करनी पड़ी। 


टेस्ला अब आर्थिक रूप से टूट चुके थे, हालात कितने बदतर हो चुके थे इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता हैं कि उन्हे दो वक्त की रोटी के लिए दो डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से खाई खोदने का काम करना पड़ा। हर रात की सुबह होती हैं। दो साल तक बेहद मुश्किल दौर से गुजरने के बाद अंततोगत्वा 1887 में टेस्ला ने AC से चलने वाली इंडक्शन मोटर का अविष्कार किया। वेस्टिंगहाउस जो कि एडिसन के प्रतिद्वंदी थे उन्होंने टेस्ला के इस इन्वेशन में पूरा विश्वास दिखाया और टेस्ला से AC मोटर के सारे पेटेंट साठ हजार डॉलर में खरीद लिए।  वेस्टिंगहाउस ने टेस्ला को दो हजार डॉलर मासिक वेतन पर अपना सलाहकार नियुक्त किया।  वेस्टिंगहाउस और  टेस्ला की जोड़ी ने सफलता का एक नया इतिहास लिख दिया। पावर सेक्टर में इस जोड़ी ने एडिसन की कंपनी को बहुत आर्थिक छति पहुंचाई।  AC पावर के क्षेत्र में यह जोड़ी आसमान की बुलंदियों को चूम रही थी।  

ये जिंदगी की जो रेखा होती हैं ये कभी एक जैसी नहीं होती कभी ऊपर कभी नीचे ठीक वैसे ही जैसे झूला कभी आगे तो कभी पीछे जाता हैं।  हर बार झूला जितना पीछे जाता हैं अगली बार उसके आगे आने की उतनी ही संभावना होती हैं।  दुर्भाग्यवश वेस्टिंगहाउस की कंपनी को किन्ही कारणवश भरी नुकसान उठाना पड़ा और कंपनी बंद होने की कगार पर आ गयी। टेस्ला ने अपने सारे शेयर और लाभ इस बुरे वक्त में वेस्टिंगहाउस को लौटा दिए, दोस्ती की ऐसी मिसालें बहुत कम देखने को मिलती हैं।  उस दौर में टेस्ला ने बारह  मिलियन डॉलर जो आज की तारीख के हिसाब से तीन सौ मिलियन डॉलर के बराबर होगा के शेयर और रॉयलिटी बिना किसी झिझक के सर्रेंडर कर दिए। यदि वो तब ऐसा ना करते तो आज दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति होते। 


टेस्ला ने अपने जीवनकाल में लगभग तीन सौ पेटेंट अपने नाम दर्ज कराये। वो वर्तमान से कही आगे भविष्य की सोच रखते थे।  टेस्ला ने neon लाइटिंग, टेस्ला टरबाइन , bladeless टरबाइन की खोज की जिससे ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में एक नयी क्रांति आ  गयी। विकिरण के तमाम प्रयोगों के आधार पर X-RAY तकनीकि के क्षेत्र में  टेस्ला एक चमकता सितारा बन कर उभरे।  टेस्ला ने रिमोट कण्ट्रोल का इन्वेशन किया।  


दुर्भाग्य ने टेस्ला का कभी पीछा नहीं छोड़ा ,अट्ठारह सौ पंचान्नबे में जब टेस्ला पहले रेडियो सिग्नल का प्रसारण  (ब्रॉडकास्ट) करने के लिए पूरी तरह तैयार थे तभी उनकी लैब में आग लग गयी।  आग इतनी भयावह थी कि टेस्ला की वर्षों की मेहनत से संजोये गए रिसर्च और उपकरण सब जल कर स्वाहा हो गए।  ये सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं जले थे बल्कि टेस्ला के सपनो के साथ-साथ उन तमाम अविष्कारों का आधार भी जल कर राख हो चुका था जो जिंदगी को और आसान बना देते।  


टेस्ला ने हिम्मत नही हारी,उन्होंने  दोबारा रेडियो सिग्नल के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया।  टेस्ला जब रेडियो सिग्नल के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे लगभग उसी समयांतराल में इंग्लैंड के एक वैज्ञानिक मार्कोनी भी रेडियो सिग्नल पर काम कर रहे थे।  मार्कोनी ने रेडियो सिग्नल  के इन्वेंशन को  पेटेंट कराने के लिए अपना दावा ठोका पर मार्कोनी इसमें सफल नहीं हुए, कारण ये था कि मार्कोनी के कई प्रयोग टेस्ला के प्रयोगों से हूबहू मिलते थे।  


मार्कोनी ने अंततोगत्वा 1901 में पहला रेडियो सिग्नल ट्रांसमिट कर दिया। 1904 में एडिसन ने अपनी हनक और पहुंच का इस्तेमाल करते हुए  मार्कोनी के नाम रेडियो का पेटेंट करवा दिया। 1911  में मार्कोनी को उनकी इस खोज के लिए नोबल पुरुस्कार मिला। मार्कोनी ने जो रेडियो सिग्नल का ट्रांसमिशन किया था उस प्रोसेस में टेस्ला के सत्रह पेटेंट थीसिस का प्रयोग किया था। टेस्ला ने  अपने पेटेंट प्रयोग करने पर मार्कोनी के खिलाफ केस कर दिया। पर यहाँ भी टेस्ला के दुर्भाग्य ने उनका पीछा नहीं छोड़ा, केस लम्बा खिंचा और जब फैसला टेस्ला के पक्ष में आया तो टेस्ला इस ख़ुशी को जीने के लिए इस दुनिया से बहुत दूर सितारों की किसी और दुनिया में जा चुके थे।  शायद इस प्रकरण और कानूनी दाव पेंचों ने टेस्ला को पूरी तरह से तोड़ दिया था।  


सात जनवरी 1943 को अमेरिका के न्यू यॉर्कर  होटल के कमरा नंबर 3327 में निकोलस टेस्ला 86 वर्ष की अवस्था में मृत पाए गए। कहते हैं उनके आख़िरी दिनों में उनके पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी। उनके होटल का बिल भी वेस्टिंगहाउस की कंपनी ही भरती थी।  एक ऐसा अविष्कारक, जिसने हमें उन तमाम सुविधाओं की वजह दी जिन्हें हम आज भोग रहे हैं, चुपचाप इस दुनिया से विदा हो गया।  ये दुनिया निकोलस टेस्ला की हमेशा ऋणी रहेगी।  एक ऐसा दिया बुझ चुका था जिसकी रोशनी ने इस दुनिया में उजाला फैलाया।  उस दिए को कभी वो सम्मान, वो प्यार और वो पुरस्कार नहीं मिला जो उसी की चुराई हुई रोशनी के रिफ्लेक्शन से दूसरे दिए ने बटोरा।  

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